PM Viksit Gram Swaraj: कैबिनेट ने ₹7,395 करोड़ की योजना को दी मंजूरी; 2.55 लाख पंचायतों का होगा कायाकल्प
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर: भारत के ग्रामीण अंचलों में सुशासन की नई क्रांति लाने और ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार करने के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक नई केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) के रूप में PM Viksit Gram Swaraj (प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना – PM VGSY) को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। यह महत्वाकांक्षी योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक (16वें वित्त आयोग की सिफारिशों की अवधि के साथ) कुल ₹7,395.55 करोड़ के वित्तीय परिव्यय से संचालित की जाएगी। योजना का सीधा लक्ष्य देश की 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों और पारंपरिक स्थानीय निकायों के 32 लाख निर्वाचित जनप्रतिनिधियों व पंचायत कर्मियों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना, साक्ष्य-आधारित ग्राम नियोजन तैयार करना और 16वें वित्त आयोग के तहत ग्रामीण निकायों को मिलने वाले ₹4.35 लाख करोड़ के अनुदान का पारदर्शी व परिणामोन्मुख उपयोग सुनिश्चित करना है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- ‘PM Viksit Gram Swaraj’: केंद्रीय कैबिनेट ने ₹7,395.55 करोड़ की नई केंद्र प्रायोजित योजना (CSS) को दी मंजूरी।
- 16वें वित्त आयोग से समन्वय: वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू होगी योजना; ₹4.35 लाख करोड़ के ग्रामीण अनुदान से सीधा जुड़ाव।
- 2.55 लाख पंचायतों को डिजिटल शक्ति: ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर प्रतिवर्ष 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (GPDP) बनेंगी।
- 32 लाख जनप्रतिनिधियों का क्षमता निर्माण: निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों को आधुनिक गवर्नेंस व वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण।
- ‘पंचम’ (PANCHAM) एआई प्लेटफॉर्म: 17 भारतीय भाषाओं में दोतरफा संवाद; सरकारी योजनाओं की जानकारी हर नागरिक तक पहुंचेगी।
- शत-प्रतिशत ऑनलाइन ऑडिट: AuditOnline के जरिए 2.55 लाख ऑडिट योजनाएं; बिना स्थायी पदों के अनुबंध पर तकनीकी विशेषज्ञ होंगे तैनात।
PM Viksit Gram Swaraj: ₹7,395 करोड़ का वित्तीय ढांचा और 16वें वित्त आयोग का समन्वय
पंचायती राज संस्थाओं को ग्रामीण विकास का मुख्य केंद्र बिंदु बनाने के लिए योजना का वित्तीय ढांचा केंद्र और राज्यों की सहभागिता पर आधारित है।
PM Viksit Gram Swaraj के कुल ₹7,395.55 करोड़ के परिव्यय में ₹4,869.48 करोड़ का केंद्रीय अंशदान और ₹2,526.07 करोड़ का राज्य अंशदान शामिल है। 16वें वित्त आयोग द्वारा वर्ष 2026-27 से 2030-31 के दौरान ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए लगभग ₹4.35 लाख करोड़ के अनुदान की सिफारिश की गई है। इस विशाल धनराशि का गांव की वास्तविक प्राथमिकताओं और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप उपयोग करने के लिए पंचायतों की प्रशासनिक और तकनीकी क्षमता को मजबूत करना आवश्यक था। यह योजना राष्ट्रीय स्तर की प्राथमिकताओं को स्थानीय समुदाय की आकांक्षाओं के साथ एकीकृत करने का काम करेगी।
ई-ग्रामस्वराज और ‘पंचम’ AI प्लेटफॉर्म: 17 भाषाओं में योजनाओं का सीधा प्रसार
योजना के अंतर्गत ग्रामीण शासन में सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का व्यापक समावेश किया गया है:
- समग्र GPDP निर्माण: ई-ग्रामस्वराज (eGramSwaraj) पोर्टल के माध्यम से प्रतिवर्ष 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी। इसमें केंद्र व राज्य के सभी विभागों की योजनाओं, सामुदायिक संपत्तियों और उपलब्ध संसाधनों को एक डिजिटल मानचित्र पर संकलित किया जाएगा।
- ‘पंचम’ (PANCHAM) एआई प्लेटफॉर्म: 17 प्रमुख भारतीय भाषाओं में दोतरफा संवाद करने वाला यह एआई-सक्षम टूल सरकारी योजनाओं और नीतियों को सरल व सुलभ भाषा में ग्रामीणों तक पहुंचाएगा।
- 1 करोड़ नागरिकों तक पहुंच: ग्राम सभाओं और आउटरीच अभियानों के माध्यम से प्रत्येक जागरूकता चक्र में कम से कम 1 करोड़ नागरिकों को प्रत्यक्ष रूप से चर्चा में शामिल किया जाएगा।
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AuditOnline और आंतरिक राजस्व (OSR): वित्तीय स्वावलंबन और गैर-भाग IX क्षेत्रों में विस्तार
पंचायतों में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए सख्त ऑडिटिंग व्यवस्था लागू की जा रही है:
- डिजिटल ऑडिट और सार्वजनिक प्रकटीकरण: ‘ऑडिट ऑनलाइन’ (AuditOnline) प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिवर्ष 2.55 लाख से अधिक ऑनलाइन ऑडिट योजनाएं तैयार होंगी और समयबद्ध ऑडिट कराया जाएगा।
- आंतरिक राजस्व (OSR) जुटाना: पंचायतों को केवल अनुदान पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वयं के राजस्व स्रोत (Own Source Revenue) विकसित करने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
- गैर-भाग IX (Non-Part IX) क्षेत्रों को कवर: यह योजना उन सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में लागू होगी जहां पारंपरिक स्थानीय निकाय (Traditional Local Bodies) कार्यरत हैं, भले ही वहां संविधान के भाग-IX के तहत नियमित त्रिस्तरीय पंचायतें न हों।
मानव संसाधन नीति और क्रियान्वयन रणनीति: राज्य वार्षिक कार्ययोजना
योजना के क्रियान्वयन को लेकर कैबिनेट ने स्पष्ट प्रशासनिक दिशानिर्देश तय किए हैं:
- कोई स्थायी पद नहीं: योजना के तहत कोई नया स्थायी पद सृजित नहीं किया जाएगा। तकनीकी सहायता और संस्थागत तंत्र को संचालित करने के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर आवश्यकतानुसार संविदात्मक (Contractual) जनशक्ति तैनात की जाएगी।
- केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC): राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार वार्षिक कार्ययोजनाएं (Annual Action Plans) प्रस्तुत करेंगे, जिन्हें केंद्र की अधिकार प्राप्त समिति द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।
“भारत की आत्मा उसके गांवों में बसती है, और विकसित भारत का निर्माण केवल विकसित ग्रामों के माध्यम से ही संभव है। ‘प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना’ हमारे 32 लाख जनप्रतिनिधियों को ऐसी आधुनिक डिजिटल और वित्तीय शक्ति देगी जिससे ग्राम पंचायतें केवल योजना लागू करने वाली इकाई नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर स्थानीय शासन और आर्थिक समृद्धि का सशक्त केंद्र बनेंगी।”— श्री नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री, भारत गणराज्य
प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM VGSY): एक नजर में
- योजना का नाम: प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना (PM Viksit Gram Swaraj – PM VGSY)
- स्वीकृति प्राधिकरण: केंद्रीय मंत्रिमंडल (अध्यक्षता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी)
- कार्यान्वयन अवधि: 2026-27 से 2030-31 (16वें वित्त आयोग की समयावधि)
- कुल वित्तीय परिव्यय: ₹7,395.55 करोड़ (केंद्र: ₹4,869.48 करोड़ | राज्य: ₹2,526.07 करोड़)
- प्रत्यक्ष लाभार्थी: 2.55 लाख से अधिक पंचायतों के 32 लाख जनप्रतिनिधि और कर्मचारी
- जन सहभागिता लक्ष्य: प्रत्येक जागरूकता अभियान में 1 करोड़ नागरिकों तक सीधी पहुंच
- प्रमुख तकनीकी प्रणालियां: ई-ग्रामस्वराज (GPDP), AuditOnline और ‘पंचम’ (17 भाषाओं में AI संचार)
- भौगोलिक दायरा: सभी राज्य व केंद्र शासित प्रदेश (पारंपरिक स्थानीय निकायों सहित)
- मानव संसाधन प्रारूप: स्थायी पद नहीं; ब्लॉक/जिला स्तर पर आवश्यकता आधारित अनुबंध विशेषज्ञ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
PM Viksit Gram Swaraj योजना का कुल वित्तीय परिव्यय और कार्यान्वयन अवधि क्या है?
PM Viksit Gram Swaraj योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि के अनुरूप 2026-27 से 2030-31 (पांच वर्ष) के लिए मंजूर किया गया है, जिसका कुल बजट ₹7,395.55 करोड़ (केंद्रीय अंश ₹4,869.48 करोड़ और राज्य अंश ₹2,526.07 करोड़) है।
इस योजना से देश की कितनी पंचायतों और जनप्रतिनिधियों को लाभ मिलेगा?
योजना के तहत देश की 2.55 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों व पारंपरिक स्थानीय निकायों के लगभग 32 लाख निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों का क्षमता निर्माण किया जाएगा।
योजना के तहत ‘पंचम’ (PANCHAM) और ई-ग्रामस्वराज प्लेटफॉर्म की क्या भूमिका होगी?
‘पंचम’ एक 17 भाषाओं का AI-संचालित दोतरफा संचार मंच है जो ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देगा, जबकि ई-ग्रामस्वराज के जरिए प्रतिवर्ष 2.55 लाख समग्र ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (GPDP) तैयार की जाएंगी।
क्या इस योजना के तहत नए सरकारी स्थायी पदों का सृजन किया जाएगा?
नहीं, योजना के तहत कोई भी नया स्थायी पद सृजित नहीं किया जाएगा। तकनीकी सहायता और क्रियान्वयन के लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर आवश्यकतानुसार अनुबंध आधारित विशेषज्ञ रखे जाएंगे।
आधिकारिक स्रोत: कैबिनेट सचिवालय / पंचायती राज मंत्रालय / प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB), भारत सरकार, नई दिल्ली